5 पद्मश्री और 1 पद्मभूषण बिहार की झोली में

७०वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कुल 112 विभूतियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमे से बिहार के छह लोग हैं| भाजपा सांसद हुकूमदेव नारायण यादव को पद्मभूषण एवं मनोज वाजपेयी को अभिनय, राजकुमारी देवी को कृषि, भागीरथी देवी को जन सरोकार, गोदावरी दत्ता को मिथिला चित्रकला, तथा ज्योति कुमार सिन्हा को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा गया है।

हुकुमदेव नारायण यादव

मधुबनी से भाजपा सांसद हुकूमदेव नारायण यादव को पद्मभूषण सम्‍मान मिला है। सादगी के प्रतीक हुकूमदेव बाबू की पहचान उनके भाषणों से भी है। उन्हें 2014-17 सत्र के लिए आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंट्रियन का अवार्ड भी मिला है। समाजसेवी होने के साथ हुकुमदेव नारायण जी एक किसान भी हैं।

अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जानेवाले बीजेपी नेता ने इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर अपने अंदाज में कहा, ‘यह भी पूछने की बात है? यह भी कोई प्रश्न है? मुझे ऐसा ही लग रहा है जैसे कोई उपेक्षित और उपहासित हो, कहीं उसको सम्मान न मिला हो और अचानक राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए तो वह कितना आनंदित होगा, यही स्थिति आज है।’

hukumdev-narayan

मनोज वाजपेयी

बिहार की मिट्टी में जन्मे और देश विदेश में अपने सरल और सटीक अभिनय से सबका मन मोह लेने वाले मनोज बाजपेयी को पद्म श्री पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई|

अगर बात हो अभिनय की तो मनोज बाजपेयी को ये पुरस्कार पहले ही मिल जाना चाहिए था| गोविन्द निहलानी की द्रोहकाल से अपने फ़िल्मी अभिनय सफ़र की शुरुआत करने के बाद मनोज बाजपेयी को पहला ब्रेक सत्या से मिला| इस से पहले छोटी-मोटी भूमिकाएं उन्हें जरुर मिली, लेकिन उनमे कुछ खास करने को था नहीं| लेकिन सत्या के भीखू म्हात्रे के किरदार में मनोज बाजपेयी ने अपने अभिनय कौशल का जो तड़का लगाया, उसकी महक आज भी हर सिनेमा प्रेमियों को याद है|

Manoj-Bajpayee

राजकुमारी देवी – “किसान चाची”

पितृसत्तात्मक समाज में एक औरत होने का हर दंश झेलते हुए भी अपने दम पर आगे बढ़ने की एक अप्रतिम कहानी है पद्मश्री राजकुमारी देवी जी की| एक औरत जिसे सामाजिक बंदिशों को तोड़कर स्वावलंबी बनने की कोशिश के चलते समाज से बहिष्कृत किया गया हो, वही औरत जब पुरे देश में किसान चाची के नाम से मशहूर हो जाये, एक कृषिप्रधान देश में इस से बड़ी प्रेरणा आज के युवा पीढ़ी के लिए नहीं हो सकती|

आधुनिक तकनीक से खेती करने से लेकर, घर में ही अचार-मुरब्बे बनाकर साइकिल से बाज़ार में बेचने तक का काम किया| पहली बार उन्हें पहचान मिली जब 2003 के किसान मेले में उनके उत्पाद को पुरस्कार मिला। तब से लेकर अब तक किसान चाची ने मुड़ कर नहीं देखा| बिहार सरकार ने भी इन्हें किसान श्री सम्मान से सम्मानित किया| इनकी प्रतिभा, अदम्य साहस, और लीक से हट कर हासिल हुई कामयाबी के चलते इन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे) और अमिताभ बच्चन जी से भी सम्मान हासिल हो चूका है|

अपनी कामयाबी में किसान चाची पूसा कृषि विश्वविद्यालय को भी भागीदार मानती हैं| अकेले शुरू हुआ किसान चाची का सफ़र अब एक कारवां में तब्दील हो चूका है| आज 250 से ज्यादा महिलाएं उनसे जुडी हैं जो विभिन्न प्रकार के प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद बनाती हैं| एक समय साइकिल से अपने उत्पादों को बेचने के लिए तिरस्कार झेल चुकी किसान चाची अब अपने उत्पाद निर्यात भी कर रही हैं|

kisanchachi

भागीरथी देवी – “सफाई कर्मी से विधायक बनने का सफ़र”

नरकटियागंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी के दफ्तर में झाड़ू लगाने का काम और 800 रूपए मासिक कमाने वाली महिला भागीरथी देवी आज पद्मश्री से सम्‍मानित है| वह रामनगर से चार बार विधायक रही हैं और क्षेत्र में उनकी पहचान उनके अच्छे कार्यों के चलते है|

भागीरथी देवी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए कई काम किये| अपने ही घर में उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की अनुमति दी| इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को कई विषयों जैसे कि उनके खिलाफ हो रहे अत्याचार, महिलाओं के मूल अधिकार, दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार, और एक समान वेतन जैसी सामाजिक बुराइयों से अवगत कराया|

भागीरथी देवी

ज्योति कुमार (आईपीएस – 1967) – मुसहर समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश

रिटायर्ड आइपीएस ज्योति कुमार सिन्हा को सोशल वर्क-अफोर्डेबल एजुकेशन के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा गया। पटना स्थित बेली रोड पर वह इंग्लिश मीडियम में कक्षा एक से 12वीं तक आवासीय विद्यालय, “शोषित समाधान केंद्र” चला रहे हैं, जहाँ लगभग 350 मुसहर बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है | इनका एक छात्र कौन बनेगा करोड़पति में चयनित होकर 25 लाख रुपए का इनाम भी जीत चूका है।

jyoti kumar sinha

गोदावरी दत्ता

88 वसंत देख चुकी शिल्प गुरु गोदावरी दत्ता मधुबनी पेंटिंग की नामचीन हस्ती हैं| 1964-65 से ही मधुबनी पेंटिंग के क्षेत्र में काम कर रही गोदावरी दत्ता उम्र के इस पड़ाव पर भी पेंटिंग बनाती नजर आती हैं। अबतक कई बार अलग-अलग देशों का दौरा कर चुकी पद्मश्री दत्ता ने विदेशों में भी इस शिल्प को पहचान दिलाई है। उनकी पेटिंग जापान के मिथिला म्यूजियम में भी प्रदर्शित की जा चुकी है।

Godavari Dutta

इन सभी को पद्म सम्मान मिलने पर पटनापेज3 ढेर सारी बधाई देता है एवं इनके योगदान को नमन करता है|

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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