मुजफ्फरपुर की लीची के बाद अब सिलाव के खाजा को मिला GI टैग

कुरकुरे मीठे ( एवं नमकीन)और मुह में जाकर घुल जाने वाले सिलाव के खाजा ने आज अपने नाम GI टैग हासिल कर लिया |

आखिर GI टैग है क्या ?

GI (Geographical Indication) या भौगोलिक संकेत एक प्रकार का मुहर है जो किसी उत्पाद के लिए प्रदान किया जाता है | इस मुहर को प्राप्त करने के बाद पूरी दुनिया में उस उत्पाद को महत्त्व प्राप्त हो जाता है साथ ही सामूहिक रूप से उसक्षेत्र को इसके उत्पाद का एका धिकार प्राप्त हो जाता है | इसके लिए शर्त ये है की उस उत्पाद का उत्पादन या प्रोसेसिंग उसी क्षेत्र में होना चाहिए जहा के लिए GI टैग लिया गया है |

बिहार में सिलाव खाजे से पहले मुज्ज़फरपुर की लीची को GI टैग इसी वर्ष प्राप्त हुई है |

सिलाव खाजे के बारे में कुछ रोचक तथ्य –

  • सिलावखाजा नालंदा के पारंपरिक पकवानों में से एक है |
  • सिलाव खाजा लगभग 200 वर्षपुराना है |
  • स्विस चिकित्सक बुकानन हैमिल्टनने सिलाव खाजे के बारे में 19 वीं शताब्दीके अपने दौरे में लिखा था|
  • लोक-साहित्य की मानेतोसिलाव खाजे का नाम गौतम बुद्ध से प्राप्त हुआ |
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार गौतम बुद्धअपनेशिष्यों के साथ भ्रमण कर रहे थे, तभी उन्होंने इस खाजे को चखा, शिष्यों ने उनसे इस मिठाई के बारे में पूछा तब गौतम बुद्ध ने खा खा-जाजिसकोसबने इस मिठाई का नाम ही समझ लिया |

सिलाव खाजा न केवल पुरे बिहार में विख्यात है, बल्कि नालंदा भ्रमण करने वाले विदेशी सैलानियों के बीच भी ये काफी पसंद किया जाता है|

सिलाव खाजा आद्योगिक स्वावलम्बी सहकारिता समिति की अर्जी पर भौगोलिक संकेत, चेन्नई ने 11 दिसम्बर को सिलाव के खाजे को GI टैग दिया | इस समिति में कुल 68 सदस्य हैं, और लगभग सभी सिलाव खाजा बनाने या बिक्री से जुड़े है| वो सभी सिलाव खाजे को GI टैग मिलने से काफी खुश है, और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और पहचान मिलने की उम्मीद है|

बिहार में अलग अलग स्थान पर अपग अलग चीज़ें प्रसिद्ध है, चाहे गया का तिलकुट हो, केसरिया पेड़ा हो या मनेर का लड्डू| ये सब स्थान विशेष के वातावरण, वहां की मिट्टी और पानी के ऊपर निर्भर है| यही कारण है, की सारी विधि और सामग्री समान होने  के बाद भी वो स्वाद कहीं और नहीं मिल पता जो मौलिक स्थान पर बनी हुई पारंपरिक मिठाइयों में आता है| तो अगली बार जब भी आप राजगीर की ओर रुख करें, सिलाव जाकर काली साह का मशहूर खाजा खाना और खिलाना न भूलें|

Khaja Puri

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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