छठ पूजा – लोक आस्था का पर्व

छठ पूजालोक आस्था का पर्व

 

“काँच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए ” –  शारदा सिन्हा जी के इस गीत के बिना बिहार का महापर्व “छठ पूजा” अधुरा सा लगता है | छठ पूजा बिहार का एक ऐसा पर्व है जिसमें विदेश में रहने वाले लोग भी अपने घर आने से खुद को रोक नहीं पाते हैं| फिर  चाहे और किसी त्यौहार में आये या न आये लेकिन इस महापर्व में घर लौट ही आते है | लोक आस्था का यह पर्व हर किसी को अपने घर और परिवार की ओर खींच ही लेता है |

chath puja

सूर्योपासना का यह महापर्व  मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश और इसके साथ ही विदेशों में भी अत्यधिक हर्षौल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है | यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है | पहली बार चैत शुक्ल पक्ष षष्ठी में जिसे हम चैती छठ भी कहते है और फिर दूसरी बार कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी में जिसे कार्तिकी छठ कहा जाता है |

लोक आस्था के इस महापर्व में साफ़-सफाई का बहुत महत्व है| सभी लोग अपने घर के आस पास काफी सफाई रखते है, घाटों की सफाई करते हैं, सजावट करते हैं, पूरा शहर मानो रंग बिरंगी रौशनी से जगमगा उठता है | कई जगह लोग एक जगह मिल कर इस पर्व को मनाते हैं, एक जगह सारे परिवार वाले एक जुट हो कर मिल जुल कर इस महापर्व के दिन श्रद्धा और निष्ठा से सूर्य भगवान की आराधना करते हैं |

chath puja

छठ व्रत से अनेक कथायें प्रचलित हैं, जिनमे से एक कथा के अनुसार जब  पांडव अपना सारा राज पाट जुए में हार गये, तो श्री कृष्ण के बताये जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा जिस से उनकी मनोकामनाएं पूरी हो गयी और पांडवो का उनका राजपाट मिल गया | हर वर्ष लाखों लोग अपने मन में मनोकामनायें लिए छठ मैया की उपासना करते है | कहते हैं छठी  मैया अपने हर श्रद्धालु के दुःख दर्द को समझती है और उनके सभी कष्टों का निर्वाह भी करती है |

चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व नहाय – खाय से शुरू होता है जिसमे सभी छठ व्रती पूरी स्वच्छता और निष्ठा से गंगा जल से स्नान कर प्रसाद बनाती है | इस दिन मुख्य रूप से चावल, चना दाल और लौकी की सब्जी प्रसाद के लिए बनाई जाती है जिसे छठ व्रती के ग्रहण करने के उपरांत सभी अन्य लोगो को प्रसाद के रूप में दिया जाता है |

छठ पूजा के दुसरे दिन छठव्रती पुरे दिन उपवास रखने के बाद शाम में प्रसाद ग्रहण करती है जिसे खरना (कुछ स्थानों पर इसे लोहंडा भी कहा जाता है) कहते है| इस दिन विशेष रूप से गुड़ से बनी खीर और मिटटी के बर्तन में बनी रोटी से प्रसाद बनाया जाता है जिसे केले के पत्ते पर रख कर छठी मैया की पूजा की जाती है |

chath puja

छठ पर्व के तीसरे दिन प्रसाद के रूप में ठेकुआ बनाया जाता है, जिसे छठ व्रती शुद्ध घी, गेहूं के आटे और चीनी के मिश्रण से बनाती हैं| इस दिन अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है| शाम को पूरी  व्यवस्था कर बाँस की टोकरी अथवा सूप में फुल – फल और ठेकुआ को सजाते हैं| सेव, ईख, संतरा, कच्चा हल्दी, निम्बू, नारियल आदि  फल फुल से सजे दौरे को सर पर उठाकर छठ घाट तक पैदल जाते है, जहाँ डूबते हुए सूर्य को प्रसाद भरे सूप और दूध से अर्घ्य दिया जाता है |

चार दिवसीय महापर्व के आखिरी दिन उदयमान सूर्य को अरघ देकर छठ व्रती शरबत, गुड़, और अदरक को खा कर अपने निर्जले व्रत को तोड़ती हैं और पारण करती हैं |

chath puja

छठी पर्व सूर्य देवता की आराधना का पर्व हैं और इसलिए इसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त हैं| श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना करके वर्ष भर सुखी, स्वस्थ और निरोगी होने की कामना करते हैं|

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

Leave a Reply