रोहतास गढ़- स्वर्णिम इतिहास | आशिष कौशिक

रोहतास- ये सिर्फ बिहार का एक जिला नहीं पूरा का पूरा इतिहास है | बिहार की एक ऐसी भूमि है, जहां संस्कृतियाँ विकसित हुई हैं और धर्म उभर कर सामने आया है |

इस किले के निर्माण का इतिहास काफ़ी पुराना है, वहां के बुजुर्ग कहते हैं, इस किले का निर्माण त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा त्रिशंकु के पौत्र व राजा हरिश्चंद्र के पुता रोहिताश्व ने कराया था| रोहतास गढ़ का किला भारत के अन्य किलों की तरह ही मशहूर और भव्य है|

रोहतास गढ़ का किला काफी भव्य है। किले का घेरा 28 मील तक फैला हुआ है। इसमें कुल 83 दरवाजे हैं, जिनमें मुख्य चारा घोड़ाघाट, राजघाट, कठौतियाघाट व मेढ़ाघाट है। प्रवेश द्वार पर निर्मित हाथी, दरवाजों के बुर्ज, दिवालों पर पेंटिंग अद्भुत है। रंगमहल, शीशमहल, पंचमहल, खूंटामहल, आइना महल, रानी का झरोखा, मानसिंह की कचहरी आज भी विद्यमान हैं। परिसर में अनेक इमारतें हैं जिनकी भव्यता देखी जा सकती है|

रोहतास गढ़ किले पर बिहार सरकार द्वारा रोहतास महोत्सव आयोजित किया गया था | वनवासी समुदाय के लोगों का भिन्न-भिन्न स्थानों से जनसमूह यहाँ 2 दिन पहले से ही ईकट्ठा होना शुरू हुए थे| दूर-दूर बसे हुए खरवार, चेरो, उरांव जनजाति के लोग अपने समुदाय के लोगों से मिलकर एक दुसरे में ख़ुशी बांटते हैं, और कहीं न कहीं बिहार की यही खूबी हमें दूसरों से अलग बनती है|

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Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it's a cactus.

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