पंकज त्रिपाठी : फर्श से अर्श तक का सफ़र

जी हम पंकज त्रिपाठी की बात कर रहे या फिर कह ले “कालीन भईया “| हम सब ने सुना है लगन और मेहनत  से किया हुआ काम हमे जीवन में सफल बनता है और इसका सही उदहारण हैं पंकज त्रिपाठी। पंकज त्रिपाठी एक भारतीय कलाकार हैं जो बॉलीवुड में आज अपने नेचुरल एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं| वैसे  एक्टिंग की शुरुआत इन्होंने मेहज १२ साल से ही की थी वो भी एक बालिका कलाकार के रूप में।

पंकज त्रिपाठी बिहार के गोपालगंज के रहने वाले है| दसवीं तक पढाई करने के बाद आगे की पढाई के लिए वो पटना आये। पटना आने के बाद उनका झुकाव कला और एक्टिंग की ओर हुआ। जहाँ भी ड्रामा होता वो वहाँ आने-जाने लगे और अपनी एक्टिंग के बारे में भी सबको बताया। काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद उन्हें एक छोटा सा रोल मिला, जिसे उन्होंने बख़ूबी निभाया| जिस वजह से लोगों ने उनकी काफी प्रशंसा की। उन्होंने चार साल बतौर थिएटर आर्टिस्ट काम किया।

मजेदार घटना – पंकज त्रिपाठी की कोरस जी से मुलाकात

उन्होंने ने एक इंटरव्यू में कहा था उनके पिताजी उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे”| पर उन्होंने अपने हुनर को पहचाना और नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा, दिल्ली में अपना दाखिला करवाया| ग्रेजुएट डिग्री लेकर पंकज जी ने मायानगरी की राह पकड़ी और निकल पड़े अपने संघर्ष भरे लम्बे सफ़र पर|

पंकज त्रिपाठी के शुरुवाती दौर की फिल्मे

फर्श से अर्श तक का सफ़र पंकज त्रिपाठी जी के लिए आसान नहीं रहा| अपनी पहचान बनाने और अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने छोटे मोटे रोल भी किये| उनकी सबसे पहली फिल्म थी “रन” जिसके मुख्य अभिनेता अभिषेक बच्चन थे| इस फिल्म मे उन्होंने महज कुछ मिनट का रोल किया था। ऐसे ही कुछ बड़ी और अच्छी फिल्मो मे उन्होंने काम किया जिसमे विशाल भारद्वाज की ओंकारा प्रमुख है| इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी जी ने किचलू का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने बहुत सुर्खिया बटोरी पर इनके हाथ कुछ नही आया।

अच्छा हो या बुरा समय बदलता है

साल था २०११ जब पंकज त्रिपाठी फिल्म अग्निपथ की शूटिंग करे रहे थे| शूटिंग के दौरान ही उन्हें “गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर” का ऑफर मिला| साल २०१२ फिल्म रिलीज़ हुई, फिल्म बॉक्स ऑफिस और लोगो के दिलो मे दोनों जगह ही सुपर हिट हुई और साथ ही साथ चमकी पंकज त्रिपाठी जी की किस्मत भी। पंकज त्रिपाठी ने इस फिल्म मे “सुल्तान” की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नही देखा।

“गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर” के बाद उन्होंने कई अच्छी फ़िल्में की| फुकरे, मसान, नील बटे सन्नाटा, इत्यादि फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से चार चाँद लगाया| हर रोल में उन्होंने जान डाल दी| नील बटे सन्नाटा के स्कूल हेडमास्टर श्रीवास्तव जी का रोल शायद ही कोई और कर सकता था|

ऐसी ही एक फिल्म आई “न्यूटन”, जिसके मुख्य किरदार राजकुमार राव और पंकज त्रिपाठी थे और निर्देशन अमित वी. मसुकर ने किया था| इस फिल्म के लिउए उन्हें “नेशनल फिल्म अवार्ड से नवाजा गया।

वेब सीरीज की दुनिया में पंकज त्रिपाठी

आज का युग नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम का है| जितनी सुर्खियाँ फिल्मे बटोरती है, उस से तनिक भी कम web सीरीज नहीं| और पंकज त्रिपाठी जी दोनों जगह छाये हुए हैं| चर्चित और विवादित “सेक्रेड गेम” में पंकज जी ने “गुरूजी” का किरदार निभाया। इस वेब सीरीज को डायरेक्ट करने वाले कोई और नही बल्कि अनुराग कश्यप ही है। इसका एक डायलाग जिससे सब परिचित हैं

“कभी कभी लगता है अपुन ही भगवान है”

इस में कुछ और भी ऐसे डायलाग है जिससे राजनीतिक दलों को भी परेशानी हुई थी जिसके बाद राजनीतिक दलों ने इस वेब सीरीज पर केस दर्ज किया था और साथ ही साथ वेब सीरीज के को- स्टार और डायरेक्टर्स को भी परेशानी झेलनी पड़ी थी।

२०१८ में आयी मिर्जापुर ने भी खूब सुर्खियाँ बटोरी और साथ ही पंकज त्रिपाठी को एक नया नाम मिला, “कालीन भईया”।

पंकज त्रिपाठी ने अब हॉलीवुड पर अपनी नजरें टिका दी हैं

पंकज त्रिपाठी अब हॉलीवुड की एक फिल्म में हॉलीवुड के सुपरहीरो थॉर का किरदार निभाने वाले क्रिस हेम्सवर्थ (Chris Hemsworth) के संग एक्टिंग करते हुए नजर आएंगे। यह फिल्म नेटफ्लिक्स के लिए बनाई गई है और इसकी शूटिंग पूरी की जा चुकी है। क्रिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ‘ढाका’ फिल्म के शूट खत्म होने के कुछ तस्वीर भी शेयर किए है|

https://twitter.com/chrishemsworth/status/1092075868242001921

ढाका, एक थ्रिलर फ़िल्म है और इसे नेटफ्लिक्स ओरिजिनल के तौर पर रिलीज़ किया जायेगा| ऐसा पहली बार होगा कि पंकज त्रिपाठी किसी अंतर्राष्ट्रीय क्रू के साथ किसी हॉलीवुड प्रोजेक्ट में काम करेंगे। पंकज त्रिपाठी के साथ मनोज बाजपाई और रणदीप हूडा भी नज़र आयंगे।

जिस सहजता से पंकज त्रिपाठी अपने आप को किसी भी रोल में ढाल लेते हैं, वो अद्भुत है| अपनी अप्रतिम अभिनय क्षमता और सफलता के शिखर पर पहुँच कर भी पंकज त्रिपाठी जी अपनी सरलता और अपनी मिट्टी से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं| मशहूर किस्सागो नीलेश मिश्रा की गाँव कनेक्शन के लिए दिए गए अपने स्लो इंटरव्यू में पंकज जी ने एक बात कही थी, “शहरों में भले ही हम खर्च हो रहे हैं, लेकिन ये खर्च होने के लिए इनकमिंग/ फिक्स डिपाजिट गाँव से ही आता है”|

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it's a cactus.

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