ज्योति परिहार – एक परिचय

श्रीमती ज्योति परिहार, एक ऐसा नाम है जो आज किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है | झारखण्ड के सिंदरी शहर से दरभंगा और वर्तमान में पटना तक की उनकी यात्रा बहुत ही उतार चढ़ाव भरी रही | लेकिन उनकी उपलब्धियाँ और समाज को उनकी देन उल्लेखनीय है | जीवन के तकरीबन पांच दसक देख चुकी ज्योति परिहार जी ने एक मनोवैज्ञानिक, लेखिका और समाजसेविका के तौर पर समाज को बहुत कुछ दिया, लेकिन उनकी आज की पहचान “किलकारी” के उल्लेख के बिना अधूरी है |

Jyoti Parihar - Kilkari Bihar Bal Bhawan

किलकारी

किलकारी,ज्योति परिहार जी द्वारा प्रज्वलित ऐसा दीपक है जिसकी रौशनी हमेशा समाज को प्रकाशित करती रहेगी | जुलाई 2008, से लेकर अब तक किलकारी और वहां के बच्चों की उपलब्धियाँ आसमान छू रही है | कला हो या नृत्य, चित्रकारी हो या खेल-कूद, किलकारी की किलकारियाँ हर क्षेत्र में गूँज रही है और इस गूँज में ज्योति परिहार द्वारा प्रवाहित उर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है |

इस लेख के लिए जब पटनापेज3 ने उनसे बात की तो उनकी सरलता, सादगी और मृदुभाषिता ने मन मोह लिया | संक्षिप्त वार्तालाप के दौरान ज्योति जी ने अपना ही एक संस्मरण सुनाया, जहाँ से उन्हें बच्चों के मनोभाव को समझने और उन्हें एक अलग दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा मिली, और जो आगे जाकर किलकारी के लिए भी प्रेरणा बनी |

उन्होंने बताया की एक बार उनके पुत्र का विद्यालय में एक कार्यक्रम था जिसमे उसे स्टेज पर सबके सामने रूबरू होना था | कार्यक्रम की समाप्ति के उपरांत उन्होंने अपने पुत्र को उसकी कमियों के बारे में बताया | उनका ध्येय था की इस से उसे अपने आप को निखारने में और मदद मिलेगी | लेकिन हुआ कुछ और ही, उनके पुत्र ने कई दिनों तक उनसे बात तक नहीं की | इस घटना से ज्योति परिहार जी को बच्चों को अलग तरह से समझने की सीख मिली |

आज किलकारी ने वो कर दिखाया है जिसकी समाज को जरुरत है | बच्चे समाज का आइना भी होते हैं और भविष्य भी, लेकिन इस आईने को चमकाने और भविष्य को सुधारने में जो सार्थक पहल किलकारी के माध्यम से ज्योति जी ने की है, वो वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं है | लेकिन नित नए आयाम गढ़ने वाली श्रीमती ज्योति परिहार का कहना है, “काम करने की जिम्मेवारी का एहसास ही उन्हें काम करने की प्रेरणा देता है” | साथ ही साथ, ज्योति अपनी सफलता का श्रेय बच्चों को भी देती है | वो कहती हैं की उन्हें बच्चों से हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है |

ऐसी हैं ज्योति परिहार, जिनसे हमें सादगी और समर्पण के साथ त्याग और सेवा भावना से समाज को आगे बढाने की प्रेरणा मिलती है |

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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