मकर संक्रान्ति, तिलकुट और पतंगबाजी

जनवरी का पहला सप्ताह समाप्त, और इसके साथ ही नए साल का खुमार भी उतर गया| लेकिन साल के पहले महीने का दूसरा सप्ताह शुरू होते ही एक अजीब सा अनुभव होने लगता है| लगता है जैसे अब मकर संक्रान्ति आने ही वाला है|

यही तो सजाव दही, बासमती चुडा, और तिलकुट खाने का मौसम है| यही तो वो मौसम है जिसमे छत पर जाकर (पतंग की) पेंच लड़ाया करते थे| हर कटती हुई पतंग को लुटने के लिए मोहल्ले के दोस्तों के साथ मैराथन दौड़ लगाया करते थे| इस मौसम में तिलकुट की सोंधी-सोंधी खुशबू और उसके स्वाद का मुकाबला भला कौन सी मिठाई कर सकती है?

मकर संक्रान्ति

यूँ तो मकर संक्रान्ति संपूर्ण देश का त्यौहार है| अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नाम और अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है| लेकिन हमारे बिहार में इस पर्व को खास कर के तिलकुट, खिचड़ी और पतंगबाजी के लिए जाना जाता है| मकर संक्रान्ति पर पतंगबाजी का प्रचलन पहले नहीं था, लेकिन पिछले दशक में इसके चाहने वालों में बढ़ोतरी हुई है| बिहार सरकार द्वारा विगत कई सालों से पटना में पतंगबाजी उत्सव के आयोजन से लोगों में इसके प्रति रुझान बढ़ा है|

मकर संक्रान्ति के दिन सुबह में चुडा-दही और तिलकुट तथा रात में खिचड़ी खाने का रिवाज़ बिहार के लगभग हर घर में है| साथ ही इस दिन दान करने का बहुत महत्व है| अपने सामर्थ्य के हिसाब से लोग इस दिन तिल, चावल, चुडा, सोना, गाय, ऊनी वस्त्र, तथा कम्बल दान करते हैं|

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तिलकुट – बिहार का अपना गज़क

मकर संक्रान्ति पर तिल खाने का नियम है| लेकिन बिहार में इस नियम को तिलकुट और तिल के लड्डू (जिसे मस्का नाम से भी जाना जाता है) खाकर पूरा किया जाता है| तिलकुट बिहार के प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है| इसे बिहारी गज़क भी कह सकते हैं| ये आकर में गज़क के जैसा नहीं होता लेकिन स्वाद में गज़क से मिलता जुलता है|

गया के बने हुए तिलकुट का स्वाद और उसकी मिठास करीब-करीब हर बिहारी को पता होता है| मार्केटिंग तो ऐसी कि हर गली-नुक्कड़ पर तिलकुट बेचने वाले दूकान के आगे बैनर लगाते है, “गया का प्रसिद्ध राम तिलकुट भण्डार का तिलकुट यहाँ उपलब्ध है”|

पटना में उत्तम गुणवत्ता के तिलकुट म्यूजियम के पास, बोरिंग रोड और अशोक राजपथ पर महेन्द्रू में उपलब्ध हैं| इन दिनों किसी के घर जाने पर “कैडबरी सेलिब्रेशन” न ले जाकर ताड़ के पत्तों से बने “खोंचड़ा” में तिलकुट ले जाने पर मेजबान को ज्यादा ख़ुशी होती है| वैसे आजकल तिलकुट भी आकर्षक पैकिंग में उपलब्ध है| गया के राम तिलकुट भंडार को भी अब “प्रमोद लड्डू भण्डार” के एयर टाइट पैकिंग से टक्कर मिल रही है| तिलकुट का भी बाजारीकरण हो गया है|

TILKUT

पतंगबाजी

मकर संक्रान्ति पर बिहार सरकार द्वारा आयोजित पतंग-उमंग उत्सव के बाद से बिहार में मकर संक्रान्ति पर पतंग उड़ाने का प्रचलन थोडा बढ़ा है| इस से पहले राज्य के कुछ हिस्सों में अलग अलग मौकों पर पतंग उड़ाया जाता था| कहीं दिल्ली की तरह 15 अगस्त को, तो कहीं शिवरात्रि के दिन जोर-शोर से पतंगबाजी होती थी| लेकिन राजधानी पटना में फिलहाल मकर संक्रान्ति और पतंगबाजी एक दुसरे का पर्याय बन चुके हैं|

patang baji

वैसे यहाँ भी पिछले कई सालों से बाजार ने दस्तक दी है और लोकल मांजा और शहर में ही जरुरतमंदो द्वारा बनाये गए कागज के पतंग का स्थान चीनी मांजे और प्लास्टिक से बने आकर्षक डिजाईन के पतंगों ने ले ली है| अच्छा होता अगर सरकार इसमें हस्तक्षेप करती और ऐसे हर छोटे-मोटे काम जिस से लोकल कारीगरों को मौसमी रोजगार मिलता था, उसे उन तक ही सीमित रखा जाता| शायद ऐसा होता तो उन कारीगरों के घर भी मकर संक्रान्ति में तिलकुट का स्वाद और कतरनी चिवड़े की महक फैलती|

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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