होता रहा व्यापार देह का, सरकार शराब में डूबी रही – मुज्ज़फरपुर बालिका गृह केस

बालिका गृह, घर, उन बेसहारा लड़कियों का या कहे बच्चियों का जिनके न कोई माँ बाप है न कोई दूसरा सहारा | कही से भूली भटकी यहाँ पहुंची, रहने को घर, खाने को खाना, पहेन्ने को कपडे, और सोने को बिस्तर सब मिला पर इसकी कीमत थी उनकी इज्ज़त, उनकी मासूमियत और उनका आत्मविश्वास| इस बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों की उम्र 12-15 साल बताई जाती है| और इस बालिका गृह को चलाने के लिए सरकार पैसे भी देती है | इस बालिका गृह में कुल 42 बच्चियां रहती है, जिनमे से 29 के साथ बलात्कार और यौन शोसन की पुष्टि हुई | टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस ने इस गृह का सोशल ऑडिट किया था, और अप्रैल में ही प्रशासन को इस घिनौने रैकेट के बारे में इत्तेला कर दिया था, जिसके बाद 28 मई को एक एफ आई आर दर्ज हुई| जांच के बाद इस बात की पुष्टि हुई की 42 में से 29 बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया गया है, आगे की जांच में कई और बातें सामने आई जैसे इन बच्चियों को बेहोश करके इनके साथ दुष्कर्म किया जाता था, एक बच्ची के विरोध करने पर उसे पीट पीट कर मार दिया गया और उसी बालिका गृह के परिसर में दफना दिया गया | 2013-18 के बीच 4 बच्चियों के गायब होने की भी बात सामने आई है, जिसमे से 3 की मौत हो चुकी है और इस बात की रिपोर्ट कही किसी पुलिस स्टेशन में दर्ज नहीं हुई है |

हम और आप इस बात का अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते की ऊन बच्चियों पर क्या बीत रही थी इस पुरे वक़्त, वो हर वक़्त किस खौफ में जी रही थी इस बात का अंदाज़ा लगाना भी हमारे लिए मुश्किल है| इस मामले की जाँच शुरू हुए एक महिना बीतने को है पर इस बालिका गृह के करता धर्ता ब्रजेश ठाकुर को पुलिस अबतक रिमांड पे नहीं ले पाई है| आखिर क्यूँ? इतने बारे रैकेट का खुलासा हुआ है जिसमे राजनीतिक, न्यायपालिका, नौकरशाही और पत्रकारिता सबकी मिली भगत सामने आ रही है तब भी मीडिया और सरकार इतनी धीमी क्यूँ चल रही है??? 11 में से 10 लोगो की गिरफ़्तारी हो चुकी है पर आगे कोई कार्यवाही क्यूँ नहीं हो रही है | ब्रजेश ठाकुर कहाँ है?? इतने बड़े रैकेट के मुख्य आरोपी को बेनकाब करने की कोशिश मीडिया क्यूँ नहीं कर रही है ????

Balika Grih

क्या ये मुद्दा राहुल गाँधी के गले मिलने से बड़ी खबर नहीं है??? बुरारी मर्डर केस से बड़ी खबर नहीं है क्या ये ???

एक परिसर जहाँ सरकार के आला अधिकारी हर महीने जाँच करने जाते है, क्या उन्हें इतने वक़्त में ये नहीं पता चला की 29 लड़कियों के साथ रोज़ बलात्कार हो रहा है??? एडिशनल जिला जज हर महीने इस जगह के दौरे पे आते थे, (कमसेकम रजिस्टर तो यही कहती है की यहाँ हर महीने जाँच होती थी) के सामने भी ये बात कभी नहीं आई?? इन बालिका ग्रहों में समाज कल्याण विभाग के अधिकारीयों का भी आना हर हफ्ते अनिवार्य है, क्या वो आए नहीं या ये तमाम लोग जो उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किये गए थे, वो भी इस दुष्कर्म में शामिल थे???

मतलब कैसे इतनी जांच और सरकारी रख रखाव के बीच, 29 लड़कियों के बलात्कार की बात 2018 के अप्रैल में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस के सोशल ऑडिट में सामने आई| ये तमाम अधिकारी किस बात की जांच इतने सालों से कर रहे थे, और इनमे से एक अधिकारी को भी इतने सालों में इस घिनौने अपराध का आभास नहीं हुआ???

और जब  टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस ने अप्रैल में इस घिनौनेपण का खुलासा समाज कल्याण विभाग के समक्ष कर दिया था तो एफ आई आर एक महीने बाद क्यूँ दर्ज हुई? ऐसा लगता है पूरी व्यवस्था ही आरोपी को बचने में लगी है| राजनेता, पत्रकारिता सब आरोपी को बचाने में लगे है|

सबसे बड़ी और झकझोर देने वाला सवाल तो ये है की 29 लड़कियों का बलात्कार हुआ इस बात की पुष्टि तो हो गयी, पर लगातार ये घिनौनापन कर कौन रहा था??? क्या ये अबतक सामने नहीं आ जाना चाहिए था??? क्या किसी को भी ये जान ने में दिलचस्पी नहीं है की इन बच्चियों को किसके सामने पेश किया जाता था?? क्या ये संस्थान देह व्यापर करने और करवाने का एक अड्डा बन चूका था?? हैरानी की बात है की 2 महीने बीत जाने पर भी ये बातें सामने क्यूँ नहीं आई है| इस घिनौनेपन पर सरकार और हमारे सुषासन बाबु मुह बंद करके क्यूँ बैठे है??

क्या पूरी की पूरी सरकार और अधिकारी शराब पकड़ने और बंद करने में लगे है?? क्या उनका दूसरा कोई काम नहीं है???

सरकार बोल रही है की जांच चल रही है, पर जाँच वैसे ही हो रही है जैसे आज तक होती आई है | ब्रजेश ठाकुर की संलिप्तता इस मामले में कितनी है ये तो जाँच के बाद पता चलेगी, पर पहले जांच तो हो, एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने ब्रजेश ठाकुर को रिमांड में लेने के लिए कोर्ट में अर्जी लगायी पर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया| दुबारा अर्जी लगायी गयी ये बोल कर की ब्रजेश ठाकुर जेल में सहयोग नहीं कर रहे रिमांड में लेकर ही कोई बात हो सकती है पर कोर्ट ने फिर से इस बात को नकार दिया| आखिर बिना जाँच के बात सामने आएगी कैसे??

हम और आप सभी जानते है की सीधे ऊँगली से घी नहीं निकलने वाली है, इस केस का भी हाल हमारे देश में बाकि 3 करोड़ केस जैसा ही होगा, बरसों तक मुकदमा चलेगा और किसी को कुछ नहीं होगा| यहाँ पे जिम्मेदारी हमारी और आपकी है, मुज्ज़फरपुर की जनता और मीडिया को सही तरीके से इस मुद्दे को उठाना और आगे बढ़ाना चाहिए क्यूँकी सरकार तो आरोपी को रिमांड में भी नहीं लेने दे रही|

इन लड़कियों का कोई नहीं तो इनके लिए आवाज़ उठाने वाला भी कोई नहीं, कहा गयी महिला मोर्चा की अध्यक्ष और महिलाएं, क्या उनके कान में ये बात पड़ी नहीं या तेल डाल कर सो रही है ये महिलाए, और क्या ये दल और महिलाएं केवल घटना घटित होने के बाद ही सक्रिय होती है, उसके पहले इनका कोई दायित्व नहीं है क्या|

इस शर्मनाक घटना ने हर किसी को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है, उम्मीद बस इतनी है की हम नींद से जागे और इस लड़कियों को इंसाफ दिलाये| जिनका कोई नहीं उनके हक़ के लिए हम और आप आगे आए|

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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