गोपालगंज के युवा कवि प्रियांशु शेखर की कविता- “कान खोल के सुन लो पाकिस्तान”

3 मार्च की शाम, साल्ट रेस्टोरेंट, पटना सेंट्रल मॉल, खचाखच भड़ा था बिहार की हर गली से आये प्रतिभावान युवाओं से| मौका था, पटना पेज 3 द्वारा आयोजित ओपन माइक इवेंट का| कई प्रतिभावान युवाओं के बीच प्रियांशु शेखर ने स्वरचित कविता पाठ करके सबका मन मोह लिया और कविता पठान में प्रथम पुरुस्कार से नवाजे गए |

प्रियांशु शेखर गोपालगंज के रहने वाले हैं हालांकि उन्होंने अपनी पढाई पटना से की है और अभी वो बी.कॉम में स्नातक कर रहे हैं। प्रियांशु को पढ़ने और लिखने का शौक बचपन से ही था, और वह अपने आस पास घट रही घटनाओं को कविता का रूप देते है | पुलवामा में हुई घटना को दर्शाते हुए उनकी कविता कुछ इस प्रकार है – Priyanshu Shekhar

“कान खोल के सुन लो पाकिस्तान “

यहाँ बुद्ध भी है युद्ध भी है,

कान खोल के सुन लो पाकिस्तान

यहाँ गाँधी भी है मोदी भी है,

चाहे जिसे तुम चुन लो पाकिस्तान

 

पर अब गलबहियों का समय बीत चुका

पानी सर के ऊपर बह चुका

तुमने खूब मना ली खून की होली

घाटी में नफरत की चरस बो दी

तेरी बोयी फसल तुझे ही लौटाएंगे

तूने जो आग लगाई घाटी में

उसी से तेरा घर जलाएंगे

कुकर्मो का घड़ा है भर चूका

जितना जोर लगाना है लगा लो पाकिस्तान

समय बहुत कम बचा है

कान खोल के सुन लो पाकिस्तान |

 

स्वाभिमान बेच के जीने से अच्छा

मर मिट जाना है

माँ भारती के बेटों ने अब ये ठाना है

सिंधु के विषधर

को मजा चखाना है

कुचल के उसके फन को

फिर से नेहरू का कबूतर उड़ाना है

पर तनिक भी संदेह इसमें शेष नही

सिवाय समर के बचा अब कोई विकल्प नही

गोली का जवाब बम से देगा हिंदुस्तान,

उल्टी गिनती शुरू है

      कान खोल के सुन लो पाकिस्तान|

-Priyanshu shekhar

 

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it's a cactus.

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