वो यादों वाली इश्क़- शालिनी सिंह

Shalinee singhShalinee a girl from Patna and a budding writer is just 17 and has given her higher secondary examination recently. This girl comes with a tagline “Don’t judge me by my age”, and this is completely true. On the day of Open Mic, she startled everyone by reciting her poetry (which obviously was her own creation) and grabbed the second position.

Shalinee started writing when she was in class 6 and from then she never stopped incarnating words on paper. A stage is her love and trust me she spell bounds everyone once on stage.

Her Instagram is the place where you can see some of the best writings of her.

We at Patna Page 3 wish her all the luck and wish to see her fly high in the sky.

Shalinee’s pen name – @Shalinee_says

क्या उसको भी याद होगी,
उसकी वो पहली गुस्ताखी _
जब मेरे लिए,
    वो अपनों का दिल तोड़ आया था ।

सच में, क्या याद होगा उससे_
मेरी मुस्कान के लिए।
जब वो पहली दफा _
अपना चलता इम्तिहान 
छोड़ आया था ।

पूछना चाहती हूं उससे ,
क्या याद है तुम्हें ?
तुम्हारा वो गुस्सा ।
जब मेरा तुम्हारे लिए लिखा ,
वो खत, तुम्हारा यार 
कहीं छोड़ आया था ।

तुम्हें याद है ,
मैं कैसे ख़ुशी के अश्कों में
बह जाया करती थी ।
जब स्कूल की चेतावनी,
वाली घंटी पर अचानक –
तुम आ जाया करते थे ।

शायद तुम्हें याद हो –
  मैं कैसे घंटों इंतजार कर तुम्हारा ।.
तुम्हारे पूछने पर ,
ज्यादा इंतजार तो नहीं कराया ?
मैं इतरा कर,
झूठ बोल जाती थी ।
अच्छा, तो तुम भी _
अभी ही आए हो ।

वो तो पक्का याद होगा, 
कैसे तुम 
मेरा किसी और 
लड़के से बात करने पर ।
जला करते थे ,
ऊपर से फर्क ना पड़ने के, 
नखरे किया करते थे ।

पूछना चाहती हूं ,
कि क्या तुम्हें याद है ?
गणित कि कक्षा में –
हम पीछे बैठ !
कैसे,अपने मोहब्बत के,
आंकड़े निकाला करते थे ।

वो याद है तुम्हें ,
जब तुम मेरे भ्रम में ।
शालिनी समझ,
किसी और को –
‘तुम मेरी दुनिया हो’ बोल आए थे ।

वो तो पक्का याद होगा,
जब तुम 
जान बूझकर भीड़ में ,
मुझसे टकराते थे ।
कभी निगाहें , झुका के ,
तो कभी, नजरें चुरा के ,
मुझे देख जाते थे ।

क्या तुम्हे याद हैं , 
बीमार होने का , बहाना कर,
घरवालों के साथ _
मुझसे , दूर होने के डर से ,
घूमने जाने से मना करते थे ।
मुझे एक दफा चोट लगे _
तो कई दफा ,
सलामती की दुआ करते थे ।

पर शायद तुम्हें याद नहीं
तभी तो ,
जब मैं तुम्हारे वजह से,
तुमसे दूर हो रही थी _
तुमने खुद को ना रोका ।

सच में याद नहीं था
तभी तो,
जब तुम्हारा यार
मेरे मौत का तार तुम तक ले गया
तुम मेरे जनाजे पर भी,
लौट आओ ,नहीं कहने आए 

मरने के बाद भी
  हर रात , मै आपकी याद में मरती हूं ।
शायद आपको याद हो,
इश्क की वो रात _
14 फरवरी को ।
जब तकिए से सड़क, 
बिस्तर से गिरे थे आप –
एक साए ने,
अपने बाहो मे 
आपको बटोरा था
उसके अश्क आपके कोमल 
गालों पर गिरे थे 
पर आपको सचमुच याद नही
मुझे भरोसा है 
मेरे अश्को ने बखूबी आपको 
नींद से जगा दिया होता 
आप सचमे हमे भूल गए 
या कमबख्त अब आप 
किसी और के ही यादों में है

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it's a cactus.

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