पुलवामा हमला – शहीदों की चिताओं पर आखिर कब तक राजनीति और कूटनीति?

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के चरम समय में लिखी हुई कविता आज भी कितनी सार्थक है| एक बार फिर से हमारे जवान शहीद हुए| पूरा देश उनके मौत पर मातम मना रहा है| क्या पूरब, क्या पश्चिम, क्या उत्तर और क्या दक्षिण??? अनेकता में एकता भरे रंग से रंगीन इस देश का हर कोना आक्रोशित है| देश भी अपना है, देश में शासन भी अपना है| लेकिन अपने ही देश में अकारण शहीदों की चिता जलते देख किस देशभक्त का खून नहीं खौलेगा?

PULWAMA ATTACK

कल कश्मीर में CRPF जवानों के काफिले पर आतंकवादियों द्वारा कायराना तरीके से हमला किया गया| इसमें हमारे जवानों की मौत नहीं हुई, उनकी निर्मम हत्या हुई| 78 गाड़ियों के काफिले पर विस्फोटक से भरी गाड़ी द्वारा हमला, और अचानक हुए हमले से चकित जवानों पर छिप कर गोलीबारी की गयी|

PULWAMA ATTACK PULWAMA ATTACK

पीटीआई के मुताबिक 15 फरवरी की सुबह तक 40 जवान मौत को गले लगा चुके थे, और बाकि घायल जवानों का इलाज चल रहा है| श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर इस निर्मम घटना को अंजाम दिया गया| देश के अन्दर इस तरह ही घटना को बिना किसी जयचंद के अंजाम नहीं दिया सा सकता| कौन हैं ये जयचंद जिन्हें अपने स्वार्थ के पीछे देशहित और देश की नौजवानों की जान का सौदा करने में भी हिचक नहीं होती? क्या हमारे देश की जाँच एजेंसियां इन जयचंदों का पता लगाने में असमर्थ है?

Terrorist

कायर आतंकवादियों में इतनी हिम्मत कभी रही नहीं कि वो सामने से जंग करने की हिम्मत कर सकें| पहले भी ऐसी कितनी ही घटनाएँ हुई है, लेकिन हर बार हमारे देश की सहनशीलता की वजह से आतंकवादियों को ऐसे जघन्य अपराध करने का हौसला मिलता रहा| हमारी सहनशीलता को कमजोरी समझा जा रहा है, इसलिए अब समय सहनशीलता का नहीं है| आवश्यकता है भीषण हुंकार करने की, और राष्ट्रकवि दिनकर के निम्नलिखित पंक्तियों को साकार करने की |

याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा।

याचना, विवेचना, और आग्रह करके हम देख चुके हैं| लेकिन समय अब कूटनीति का नहीं, युद्धनीति को अमल में लाने का है| हमारे देश के वीर जवान अपने भाइयों की हत्या से आहत हैं| देश का हर नागरिक, इस कुकृत्य का जवाब चाह रहा है| प्रतिशोध नहीं, बल्कि न्याय के लिए पूरा देश हमारे सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहा है|

https://twitter.com/crpfindia/status/1096305848886923264

कश्मीर में अकारण शहीद हुए हर जवान की आत्मा बस इसी आस में होगी, कि

कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे, जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमाँ होगा|

प्रधानमंत्री जी, How’s The Josh??? पूछने का समय नहीं है| अब ये होश में रहकर जोश दिखाने का समय है| कृपया कुछ करें महानुभाव| निंदा करने का काम विपक्ष पर छोड़ दें और औए थोड़ा एक्शन ले| एक छोटा सा देश श्रीलंका अपने यहाँ के गृहयुद्ध को ख़त्म करने के लिए संपूर्ण विश्व की अनदेखी कर सकता है, फिर आप तो विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक देश के प्रधानमंत्री हैं|

आज पूरा देश सचमुच में देखना चाह रहा है. . .

HOW’S THE JOSH???

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it's a cactus.

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