माँ बड़ा, कि राजमा?

वैसे तो ये फिल्म ३० नवम्बर को ही Netflix पर रिलीज़ हुई, लेकिन आजकल ऋषि कपूर जी इतनी फिल्मे बना रहे हैं जितनी तो उनके सुपुत्र रणवीर कपूर (जी) भी नहीं बना रहे| इसलिए, ये फिल्म देखने का रोमांच नहीं था, कितनी ही बार ये फिल्म आँखों से सामने से आकर गुजर गयी और हम नकली अंग्रेजियत फील करने के चक्कर में अमेरिकी सीरियल ही देखते रहे|

दिल्ली मेट्रो में सफ़र के दौरान एक भाई साहब बगल में खड़े होकर यही फिल्म देख रहे थे, वो भी मोबाइल स्पीकर पर| इतने में ही एक डायलाग आया, “माँ बड़ा, कि राजमा?” जिस अंदाज में शीबा चड्ढा ने ये बात कही, बस लगा की अब तो देखना चाहिए|

आधुनिक जीवन में पिता-पुत्र के बीच के संबंध में खींच तान को दर्शाती ये फिल्म कभी गुदगुदाती है, कभी रुलाती है| किस तरह से एक जवान बेटे का बाप पत्नी के देहांत के बाद, अपने बेटे से २ बात करने को तरसता है, और किस तरह से एक बेटा बाप के होते हुए खुद को अनाथ समझने लगता है, इस बात को इस फिल्म ने बड़ी आसानी से दर्शाया है|

छोटे शहर में रहने वाली लड़कियों के बड़े सपने, और उन सपनों के टूटने पर घर और समाज से सहानुभूति के बदले प्रतिक्रिया झेलते हुए जीवन में आगे बढ़ने का संघर्ष| कहने में बहुत छोटी सी बात लगती है, लेकिन जब इस ज़िन्दगी जो जीना पड़े, तब समझ में आता है आटे–दाल का भाव|

राजमा-चावल, नए ज़माने में सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान को भी एक अलग तरह से दिखाती है|आगे हम न तो कहानी बताने वाले हैं, न ही कोई कारण बताने वाले हैं कि ये फिल्म क्यूँ देखना चाहिए| बस इतना कहेंगे कि दोपहर को भर पेट खा कर डकार लेते हुए देखने वाली एक हल्की-फुलकी फिल्म है| पुरे परिवार के साथ देख कर एक सन्डे मना सकते हैं| जब आमिर खान और करिश्मा कपूर के करिश्माई चुम्बन वाली राजा हिन्दुस्तानी एक पारिवारिक फिल्म थी, तो उस हिसाब से इस फिल्म में तो कुछ भी नहीं है|

तो इन्तजार किस बात का, राजमा चावल का स्वाद लीजिये|

Disclaimer

This review is written as a viewer’s point of view, not as a film review but as a movie watching experience. If you are looking for critical opinion or technical details of the movie, please move on to the world of paid reviews by popular PR experts in disguise of film critics.

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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