विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले 2018 की हुई शुरुआत, हाथियों की बिक्री पर बिहार सरकार ने लगायी रोक

इस बुधवार 21 नवम्बर2018 को बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सोनपुर मेले का उद्घाटनकिया| यह मेला पशुओं के क्रय-विक्रय और भी बहुतसारे सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्द है| चन्द्रगुप्त मौर्या (340 – 297 BCE) के समय से चला आ रहा यह मेला इस साल 32 दिनों तक चलेगा| यह मेला बिहार के वैशाली और सारण जिले के सीमा पर हर साल लगाया जाता है|

Inaguration pic

कार्तिक पूर्णिमा केशुभ अवसर पर  साधु-संत, महात्मा सहित धर्मावलंबी यहां पहुंच चुके हैं, सभीमोक्षदायिनी गंगा और गंडक नदी के संगम पर स्नानकर पुण्य की प्राप्ति करने की कामना से यहाँ आते है|

सोनपुर मेले के बारे में ये कहा जाता है की दुनिया में यह संभवतः पहला ऐसा मेला है जहा सुई से लेकर हाथी तक की खरीद बिक्री होती है| समय के साथ बहुत सरे पशुओं की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी गयी है| इस साल भी मेले में हाथीकी खरीद बिक्री पर रोक लगा दी गयी है, परहाथियों की प्रदर्शनी पर कोई रोक नहीं है |

Elephant Race

इस मेले के आकर्षण का एक माध्यमथिएटर भी है, सुशील कुमार मोदी ने स्पष्ट किया है की थिएटर के नाम पर अश्लीलता परोसने की इज्ज़ज़त नहीं है |

Theater

इस वर्ष बिहारसरकार द्वारा शराब बंदी की सफलता को दर्शाने के लिए सैंड आर्टिस्ट द्वारा की गयी कलाकृतियों को भी दर्शाया गया है|

इस मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही महत्ता है, प्राचीनकाल से लगने वाले इस मेले के स्वरूप में भले ही कई बदलाव हुए है परइसकी महत्ता आज भी वही है, तभी तो देश विदेश से पर्यटक हर साल इस मेले का हिस्सा बनने आते है| औरसरकार भी इस मेले की महत्ता को बरक़रार रखने के लिए हर संभव प्रयास करती है|

बिहार पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक डॉ़ हरेंद्र प्रसाद ने बताया, “21 नवंबर से प्रारंभ होने वाला सोनपुर मेला इस वर्ष 22 दिसंबर तक चलेगा.” उन्होंने बताया, “पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 20 स्विस कॉटेज बनाए गए हैं| मेले तक आने-जाने वालों के लिए पटना से बस सेवा प्रारंभ की जा रही है. इसके अलावे खान-पान के लिए अस्थायी रेस्टोरेंट की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है. उन्होंने बताया कि कॉटेज का आरक्षण ऑनलाइन भी कराया जा रहा है”.

Sonpur Mela

सोनपुर मेले का इतिहास –

5-6 किलोमीटर के वृहद क्षेत्रफल में फैला इस मेलाको ‘हरिहर क्षेत्र मेला’ और ‘छत्तर मेला’ के नाम से भी जाना जाता है| पौराणिक मान्यता यह है की भगवान विष्णु के दो भक्त हाथी और मगरमच्छ के रूप में धरती पर आए|जब हाथी कोणहारा घाट पर पानी पिने आया तो मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया, इस प्रकार दोनों के बीच युद्ध शुरू हो गया और यह युद्ध कई दिनों तक चला | कईदिनों तक युद्ध करने के कारन हाथी कमजोर पड़ गया और तब उसने भगवान विष्णु को याद किया| भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुदर्शन चक्र चलाकर उन दोनों के बीच के युद्ध को समाप्त किया |

इस स्थान परजानवरों की खरीद-बिक्री को शुभ बस इसीलिए मन जाता है क्यूंकि यहाँ दो जानवरों का युद्ध हुआ था | इसी स्थान पर हरि (विष्णु) और हर (शिव) का हरिहर मंदिर भी है जहां प्रतिदिन सैकड़ों भक्त श्रद्धा से पहुंचते हैं|इस मंदिर का नाम हरिहर मंदिर है, कुछ लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान राम ने सीता स्वयंवर में जाते समय किया था|

Mela

कुछ इतिहास जानकारों के अनुसार मुग़ल सम्राट के सेनापति महाराजामान सिंह ने सोनपुर मेले से शाही सेना के लिए हाथी और अस्त्र-शस्त्र खरीदा थी |

पर्यटन विभाग ने खास बसों का इन्तेजाम किया है जो सोनपुर से पटना तक ले जाती है|

 

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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