बचपन (वो एहसास ख़ुशी का) क्या सबने जिया है? कहानी- नेहा कुमारी की

 

कोई फिकर ना चिंता, मस्ती का आलम
जीवन खेल सा लगता है,
बचपन हर गम से बेगाना होता है!
इसी उमर में खुशियों का खज़ाना होता है
बचपन हर गम से बेगाना होता है. .
बचपन हर गम से बेगाना होता है!

किशोर कुमार के इस गीत की पंक्तियाँ हमें बचपन के खुशनुमे एहसास से रूबरू कराती है| पर क्या सभी बच्चों की ज़िन्दगी इनसे मेल खाती है?

आइए बात करते है नेहा कुमारी के बारे में|

उम्र तकरीबन 14-15 साल, जज़्बा और समझ 20-25 साल के व्यस्क जैसा, अब इनकी तारीफ में कुछ शब्द – विज्ञान और डांस में रूचि रखने वाली नेहा अब साइकिल और बाइक रिपेयरिंग के काम में हुनरमंद हैं | पढाई के लिए अरमान समेटे नेहा अपने दुकान पर आने वाले हर ख़राब बाइक को ठीक करती है, पंक्चर बनाती है नेहा कुमारी |

बचपन, नटखटपना, चुलबुलापन, और कई सपनों को आँखों में समेटे हर बच्चा जीता है; पर नेहा ने बचपन को अलग तरह से महसूस किया, जो खास है और अलग भी| नेहा का छोटा सा घर है और घर में बहुत सारे लोग भी| नेहा भाई बहनों में सबसे छोटी है|

चुलबुली सी, मन में डांस की चाहत, और विज्ञान में रूचि लिए आगे बढ़ रही उस छोटी सी बच्ची को जिंदगी की कठिनाइयों का अंदाज़ा भी न था, जब उसे घर की तंगी की वजह से पढाई छोडनी पड़ी| तब जिंदगी क्या होती है इसका एहसास उसे हुआ, और इस एहसास ने उसे पंक्चर की दूकान पे ला दिया| पर दोस्तों, मेरा यकीन करिए आपके और मेरे लिए ये काम छोटा हो सकता है, पर जिस मेहनत, लगन, और दृढ़ निश्चय के साथ नेहा ये काम करती है, दिल में एक अजीब गर्व की अनुभूति होती है | तेरह साल की उम्र में नेहा ने अपनी पढाई फिर से शुरू की, पर वो सातवी तक ही पढ़ाई कर पाई, उसके बाद अपने भाई के साथ काम देखने लगी |

पटना के दिनकर चौक से थोड़ी दूर स्थित सरकारी विद्यालय से सटी सड़क के किनारे, पेड़ की छांव में एक दुकान में नेहा ने पंचर बनाना, हवा भरना, बाइक ठीक करना जैसे  कामों को सीखा; और लग गई अपने भाई के साथ जिंदगी की जंग जीतने की कोशिशो में |

नेहा की जुबानी उनकी जिंदगी की कहानी

“चाहे तो मैं ये काम छोड़ सकती हूँ, पर घर की स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं कर सकती | कभी कभी मुझे घुमने, फ़िल्में देखने का मन करता है पर काम छोड़कर नहीं जा पाती, और आर्थिक तंगी ऐसा मौका भी नहीं देती|”

नेहा का सपना है वो इस दुकान को बड़ा करना चाहती है| गर्मी में पेड़ की छांव में तो काम कर लेती है पर बारिश में दुकान की स्थिति बदतर हो जाती है| सड़क पर जब लोग नेहा को यूँ काम करते देखते हैं तो उनकी निगाहें नेहा की इस बहादुरी, मेहनत, और लगन को दिल ही दिल में सलाम करती है|

हाल ही में किलकारी बाल भवन की ओर से नेहा की इस बहादुरी को गिटार और स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ताकि वो अपने संगीत के शौक को आगे बढ़ा सके|

मुझे नेहा की इस कहानी से बहुत प्रेरणा मिली| हम लोग यहाँ छोटी-छोटी तकलीफों का रोना रोते रहते हैं, जबकि कुछ लोग सब सह के भी जिंदगी को सही मायनों में जी रहे है| आरामदायक कुर्सी पर बैठ के जिंदगी की बातें करते है हम, वातानुकूलित कमरों में बैठ कर महिला सशक्तिकरण की बातें करते है| यहाँ नेहा कड़ी धूप में रोड पर खड़े होकर महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल पेश कर रही है| गर्व है हमें ऐसी महिलाओं/ लड़कियों पर, जिन्हें अपने आप को सशक्त करने के लिए किसी माइक या मंच की जरुरत नहीं है, ये अपने कर्म से महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही है|

परिवार को अपने सपनों की राह में अवरोध समझने वाली कुछ महिलाओं के सर झुके से दिखाई देते है मुझे, इस लड़की के परिवार के प्रति समर्पण, प्यार और अपने सपनो को पूरा करने की जद्दोजहद, सलाम करने को मजबूर करती है |

किशोर कुमार के ही एक दुसरे गीत से प्रेरणा लेते हुए, हमें ऐसे समाज के निर्माण की जरुरत है, जैसे समाज की चाहत इस गीत में दिखती है|

आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ, एक ऐसे गगन के तले
जहाँ ग़म भी न हो, आंसू भी न हो, बस प्यार ही प्यार पले|

नेहा तुम्हारे ज़ज्बे को सलाम है, तुम हमारे लिए एक प्रेरणा हो|

 

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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