आरक्षण क्यूँ, किसके लिए, और आखिर फ़ायदा किसका?

आज सुबह-सुबह एक खबर ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि “आरक्षण  क्यूँ, किसके लिए, और आखिर फ़ायदा है किसका?” लेकिन पहले बात उस खबर की जिसने ऐसा सोचने पर मजबूर किया|

बिहार के मुख्य सचिव ने कैबिनेट की बैठक में दो योजनाओं, “मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रोत्साहन योजना” और “मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावास योजना” के बारे में जानकारी दी| मुख्यमंत्री नितीश कुमार की तरफ से ये दलितों के लिए अभूतपूर्व तोहफ़ा है, जिसकी झलकियाँ इस प्रकार हैं –

  • BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में उतीर्ण होने पर हमारे दलित भाई-बहनों को 50 हज़ार रुपये मिलेगा (“मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत)
  • UPSC की परीक्षा उतीर्ण करने पर 1 लाख रुपये मिलेगा (“मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत)
  • 15 किलो अनाज उन दलित विद्यार्थियों को मिलेगा जो हॉस्टल में रहकर इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है (“मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावास योजना” के अंतर्गत)
  • हर महीने 1000 रूपये भी उनके बैंक अकाउंट में डाला जाएगा (“मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावास योजना” के अंतर्गत)

विकास पुरुष के नाम से मशहूर, मुख्यमंत्री नितीश कुमार इस फैसले को अपने आप में अनूठा और दलितों के विकास के लिए ली गई एक अनूठी पहल बताते हैं|

दलित मोह के कारण

विचारनीय है कि अगले साल बिहार में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, और दलित वोट कुल 15% है| हालिया हुई घटनायें, जैसे भारत बंद जो 20 मार्च को SC/ ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में था| इस फैसले में दलितों के खिलाफ अपराधों के मामले में ज़मानत और अग्रिम ज़मानत का प्रावधान किया गया| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में इस कानून का दुरूपयोग हो रहा है| इसी फैसले के खिलाफ कई दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था, जिसे कई राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिला|

इस बढ़ते तनाव के बीच BJP को इस बात का अंदाज़ा है कि दलितों के बीच उनकी छवि वोट दिलाने वाली नहीं रह गयी| प्रदेश में हमारे मुख्यमंत्री नितीश कुमार को इस बात का अंदाज़ा बहुत अच्छी तरह है की पिछले साल उन्होंने RJD से अलग हो कर दलित वोट ऐसे ही गँवा दिए; बाकि कसर BJP के साथ जुड़कर पूरा हो गयी| इस बात का फायदा RJD हर तरीके से उठा रही है| अब इस बात को मद्देनज़र रखते हुए नितीश कुमार की तरफ से दलितों के लिए ये सौगात आई है|

लोक कल्याणकारी लुभावन योजनाओं के दुष्परिणाम

इन योजनाओं के मुख्य अंश सार्वजनिक किये गए, लेकिन इस प्रकार से सरकारी सहायता पाने के लिए जो शर्तें हैं वो सार्वजनिक नहीं है| मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रोत्साहन योजना एक मांग आधारित योजना है, लेकिन मांग नहीं करने कि शर्तों का उल्लेख नहीं है| ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं:

  • अगर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का कोई छात्र एक से अधिक बार BPSC या UPSC की प्रारंभिक परीक्षा उतीर्ण होता है तो क्या वो एक से अधिक बार इस प्रोत्साहन राशि की मांग कर सकता है?
  • यदि नहीं तो किन कारणों से कोई अभ्यर्थी दूसरी बार मांग के लिए आवेदन नहीं कर सकता?
  • क्या मांग आवेदन में अभ्यर्थी के परिवार की मासिक/ वार्षिक आय या उनकी आर्थिक सम्पन्नता एक पैमाना होगा या नहीं?

आर्थिक स्थिति एक पैमाना क्यूँ नहीं?

क्या सिर्फ दलित और महादलित श्रेणी के ही छात्रों को शिक्षा और परीक्षा कि तैयारी के लिए आर्थिक मदद की जरुरत है? क्या अपेक्षाकृत ऊँची जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सभी छात्र आर्थिक दृष्टिकोण से संपन्न हैं? क्या उन्हें इस तरह की आर्थिक सहायता या प्रोत्साहन की जरुरत नहीं? और अगर उन्हें भी जरुरत है तो समाज के एक वर्ग को जान बुझ के पीछे रख कर दुसरे वर्ग को बढ़ावा देना, ये सामाजिक न्याय की उचित परिभाषा तो नहीं|

क्या ये सही है?

आरक्षण की आग में तो हमारा देश आज भी जल रहा है और आने वाले कई सालों तक जलता ही रहेगा| इस तरह के प्रावधान चुनावी वादों के रूप में कर तो दिए जाते हैं, लेकिन अंततः ये समाज में जातिवाद को बढ़ावा देने का कारण बनता है| कहाँ हम युवा समान अधिकार के लिए लड़ रहे हैं, औरतों के बराबर के हक के लिए लड़ रहे हैं; और कहाँ वोट बैंक के नाम पर राजनीतिक दल हमे अलग होने का एहसास दिला रहे हैं|

बजाय इसके कि हर किसी को समान अधिकार मिले, सरकार वोट के नाम पर राजनीती कर रही है| इस बात के फायदे हो सकते हैं, पर जो नुकसान है उन्हें हम नज़रंदाज़ नहीं कर सकते| ये फैसला हमारे समाज में जाति कि खाई को बढाने में सहायक होगा और साथ ही साथ हमारी शिक्षा व्यवस्था पर भी विपरीत असर डालेगा|

Anubha Rani

I'm an avid reader, a foodie, and a movie buff; who is passionate about the positivity around us. I love to dream and convert those dreams into words. At one moment I'm inside a shell and the very next moment I'm the ferocious one. Dynamism is my forte. Apart from being a dreamer, I'm also a woman with a beating heart and a curious mind questioning traditional social norms. I'm a rebel at one moment and just opposite at the very next moment. My fuel is the smile of my son, the happiness of my family, and lots of coffee. I'm also not ashamed of spending money on buying books and to fill my (always empty) stomach.

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